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تعـالَ حبيبي
تعـالَ هنا |
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مَـررتُ بـداري
لعلـي أرى |
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أرى روعتي
وأرى مهجتي |
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ودون حبيـبي هـو المبتغـى |
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وقـلت لها
ماداً يـدي |
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وبـين يـديَّ
معـاني الوفـا: |
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يـا من وصفتُ لأهلي |
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بـين الغـداةِ
ونـور الضحى |
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جميلةٌ أنتِ
, قويـةٌ أنتِ |
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ولـو جُمِعتْ
جميـعُ القـوى |
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يـا مَنْ ذهبـتِ
بقلبي |
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ومات عقلي
صـريعُ الهـوى |
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ونادى فؤادي
عقلي أنا |
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وآهي تنـاجيني
وصـولَ المنى |
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ومني حنيني
لعقلي شكى |
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فـردَّ العقلُ
إليـك المشتـكى |
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ونالَ ليلى
من سهدِ عيني |
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وفـازَ يـومـي
بكل الغفـا |
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ورحتُ لألغلي
صِلاتي بها |
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وأُحيي فؤادي
من هولِ الردى |
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وأُنهي حديثي
بزرعِ الفلا |
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بقـولي
: "حبيبي تعـالَ هنا" |